जोजरी नदी प्रदूषण पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, टेक्सटाइल इकाइयों के लिए हाईटेक निगरानी प्रणाली लागू होगी

*जोजरी नदी प्रदूषण पर सुप्रीम कोर्ट सख्त: टेक्सटाइल इकाइयों में अपशिष्ट जल के सटीक आकलन के लिए विशेषज्ञ समिति गठित**शीर्ष अदालत ने दो महीने के भीतर मशीन-आधारित व तकनीक-संचालित प्रणाली लागू करने का दिया निर्देश* RSPCB ने जारी किये आदेशIIT दिल्ली और विशेषज्ञ सदस्यों के साथ 6 सदस्यीय समिति का गठन, पाली, बालोतरा और जोधपुर के टेक्सटाइल क्लस्टर पर फोकसजयपुर। जोजरी नदी में बढ़ते प्रदूषण और उससे करोड़ों जिंदगियों पर मंडराते खतरे को लेकर सुप्रीम कोर्ट के कड़े तेवर के बाद राजस्थान राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (RSPCB) अब पूरी तरह सक्रिय हो गया है।
शीर्ष अदालत के निर्देशों का पालन करते हुए, बोर्ड ने टेक्सटाइल इकाइयों से उत्पन्न होने वाले अपशिष्ट जल (वेस्टवाटर) के सटीक और वैज्ञानिक आकलन के लिए एक उच्च स्तरीय विशेषज्ञ समिति का गठन किया है। यह समिति दो महीने के भीतर एक आधुनिक, मशीन-आधारित और तकनीक-संचालित प्रणाली विकसित करेगी, जो पारदर्शिता सुनिश्चित करेगी और अवैध निकासी पर प्रभावी रोक लगाएगी।सुप्रीम कोर्ट की फटकार का असर: उल्लेखनीय है कि सुप्रीम कोर्ट ने 18 मार्च 2026 को “2 मिलियन जिंदगियां खतरे में, जोजरी नदी में संदूषण, राजस्थान” (सुओ मोटो रिट याचिका (सिविल) संख्या 08/2025) शीर्षक वाली याचिका पर सुनवाई करते हुए कड़े निर्देश दिए थे। कोर्ट ने मौजूदा ‘अनुमान-आधारित’ पद्धति को ‘मजबूत, मशीन-आधारित और तकनीक-संचालित प्रणाली’ से बदलने का आदेश दिया था।

कोर्ट ने पारदर्शिता सुनिश्चित करने और अपशिष्ट जल की अवैध निकासी को रोकने के लिए इस प्रणाली को दो महीने के भीतर लागू करने की सख्त समयसीमा तय की है। RSPCB ने पहले 31 जुलाई 2023 को आकलन-आधारित दिशा-निर्देश जारी किए थे, लेकिन कोर्ट ने उन्हें नाकाफी माना।*समिति का गठन और शैक्षणिक संस्थानों का परामर्श:* शीर्ष अदालत के आदेशों की अनुपालना सुनिश्चित करने के लिए RSPCB ने IIT खड़गपुर, IIT दिल्ली और BITS पिलानी जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों के विशेषज्ञों के साथ VC और टेलीफोन के माध्यम से विस्तृत चर्चा की। इसके बाद, एक 6 सदस्यीय समिति का गठन करने का निर्णय लिया गया।*समिति के सदस्य:* बोर्ड द्वारा गठित विशेषज्ञ समिति में निम्नलिखित अधिकारी और विशेषज्ञ शामिल हैं:अमित शर्मा, ACEE, RSPCB, विवेक गोयल, SEE, RSPCB, अमित जुयाल, SEE, RSPCB,अभिषेक शर्मा, Supt.SO, RSPCB, प्रो. विवेक कुमार, IIT दिल्ली,डॉ. चिराग भीमानी, विशेषज्ञ सदस्य।*समिति का कार्यक्षेत्र और समयसीमा:* समिति को मौजूदा अनुमान-आधारित कार्यप्रणाली को मशीन-आधारित और तकनीक-संचालित प्रणाली से बदलने का जिम्मा सौंपा गया है। समिति फील्ड सर्वेक्षण करेगी, संबंधित डेटा एकत्र करेगी और हितधारकों के साथ परामर्श करेगी। इसका मुख्य कार्य टेक्सटाइल इकाइयों के लिए एक उपयुक्त वैज्ञानिक पद्धति के साथ एक तकनीक-संचालित प्रणाली तैयार करना है।
यह समिति प्रस्तावित प्रणाली की तुलना मौजूदा ढांचे से भी करेगी और इसके प्रभावों की जांच करेगी। इसके अलावा, समिति पाली, बालोतरा और जोधपुर के टेक्सटाइल समूहों के लिए सर्वोत्तम प्रथाओं और प्रक्रिया संशोधनों की सिफारिश करेगी। बोर्ड ने इस कार्य को दो महीने के भीतर पूरा करने का लक्ष्य रखा है।
*अवैध निकासी पर लगेगी रोक:* RSPCB के इस कदम से टेक्सटाइल उद्योगों में अपशिष्ट जल प्रबंधन में पारदर्शिता आने की उम्मीद है। तकनीक-आधारित प्रणाली से सटीक डेटा प्राप्त होगा, जिससे अवैध निकासी पर प्रभावी रोक लग सकेगी और जोजरी नदी सहित क्षेत्र के अन्य जल निकायों के संरक्षण में मदद मिलेगी।वरिष्ठ पत्रकार असरफ मारोठी की रिपोर्ट .



