
नई दिल्ली : आयुष्मान भारत – प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (PM-JAY) के तहत केंद्र सरकार द्वारा यूनिक हेल्थ कार्ड / डिजिटल हेल्थ रिकॉर्ड लागू करने का उद्देश्य स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक पारदर्शी, प्रभावी और जवाबदेह बनाना है। इस पहल से जहां सरकारी स्वास्थ्य योजनाओं को मजबूती मिलेगी, वहीं इसका असर प्राइवेट हेल्थ इंश्योरेंस सेक्टर पर भी साफ दिखाई देगा। हालांकि, फायदे के साथ-साथ कई गंभीर चुनौतियां भी सामने आ रही हैं।
🔹 सकारात्मक पहलू (Positive Points)
पुरानी बीमारी की सही पहचान
यूनिक हेल्थ कार्ड से मरीज की पुरानी बीमारियों और पिछले इलाज का पूरा रिकॉर्ड उपलब्ध रहेगा, जिससे सही और समय पर डायग्नोसिस संभव होगा।
इलाज के फैसले मशीन पर निर्भर होने का खतरा
डॉक्टर कभी-कभी डिजिटल रिकॉर्ड पर अधिक निर्भर हो सकते हैं, जिससे मरीज की वर्तमान स्थिति को नजरअंदाज करने का खतरा रहता है।
🔹फर्जी क्लेम पर रोक
एक ही मरीज द्वारा बार-बार या गलत जानकारी देकर क्लेम करने पर प्रभावी नियंत्रण लगेगा।
तेज़ और पारदर्शी इलाज
डॉक्टरों को मरीज का पूरा मेडिकल इतिहास तुरंत मिल जाएगा, जिससे इलाज में देरी नहीं होगी।
सरकारी निगरानी आसान
सरकार यह आसानी से ट्रैक कर सकेगी कि कौन-सा लाभार्थी कब, कहां और किस बीमारी का इलाज करा रहा है।
डिजिटल हेल्थ सिस्टम को बढ़ावा
देशभर में एक एकीकृत डिजिटल हेल्थ इकोसिस्टम तैयार होगा, जो भविष्य की स्वास्थ्य नीतियों के लिए मजबूत आधार बनेगा।
प्राइवेट हेल्थ इंश्योरेंस कंपनियों को भी फायदा
यूनिक हेल्थ कार्ड से यह स्पष्ट हो जाएगा कि मरीज को पहले से कोई बीमारी है या नहीं।
यदि कोई लाभार्थी बीमारी छुपाकर बीमा ले रहा है, तो उसका रिकॉर्ड सामने आ जाएगा, जिससे गलत क्लेम और धोखाधड़ी पर रोक लगेगी।
🔹 नकारात्मक पहलू / चुनौतियां (Negative Points)
प्राइवेसी और डेटा सुरक्षा का खतरा
मरीज का पूरा स्वास्थ्य रिकॉर्ड डिजिटल होने से डेटा लीक, हैकिंग या दुरुपयोग की आशंका बनी रहती है।
पुरानी बीमारी के नाम पर इलाज से वंचित होने का डर
कई लोगों को आशंका है कि पहले से दर्ज बीमारी के कारण भविष्य में इलाज या बीमा क्लेम में दिक्कत आ सकती है।
प्राइवेट इंश्योरेंस कंपनियों द्वारा भेदभाव की आशंका
डिजिटल रिकॉर्ड के आधार पर कंपनियां प्रीमियम बढ़ा सकती हैं या बीमा देने से इनकार कर सकती हैं।
तकनीकी समस्याएं
ग्रामीण और दूरदराज़ क्षेत्रों में इंटरनेट, सर्वर फेलियर और तकनीकी संसाधनों की कमी बड़ी चुनौती बन सकती है।
गलत या अधूरा डेटा दर्ज होने का जोखिम
एक बार गलत मेडिकल जानकारी सिस्टम में दर्ज हो गई तो उसे सुधारना जटिल और समय-साध्य हो सकता है
निष्कर्ष
यूनिक हेल्थ कार्ड आयुष्मान भारत योजना को पारदर्शी, तकनीक-आधारित और मजबूत बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है। इससे सरकार और प्राइवेट इंश्योरेंस कंपनियों दोनों को फायदा होगा, लेकिन साथ ही डेटा सुरक्षा, प्राइवेसी और आम नागरिकों के अधिकारों की रक्षा करना बेहद जरूरी है।यदि इन चुनौतियों पर समय रहते ध्यान नहीं दिया गया, तो यह सुविधा कुछ वर्गों के लिए बोझ भी बन सकती है



