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ओमकारेश्वर और मामलेश्वर ज्योतिर्लिंग में कुप्रबंधन: तीर्थयात्रियों से लूट, दर्शन में घंटों इंतजार, रिश्वतखोरी का बोलबाला

उज्जैन और ओंकारेश्वर स्थानीय प्रशासन का कहना है कि अभी बोहर भीड़ है 10 जनवरी तक ऐसे ही रहेगी श्रद्धालु कुछ समय तक यात्रा स्थगित करना ही उचित रहेगा

उज्जैन/खंडवा, 01 जनवरी 2026: मध्य प्रदेश के प्रमुख धार्मिक स्थलों ओमकारेश्वर ज्योतिर्लिंग और मामलेश्वर मंदिर में तीर्थयात्रियों की बढ़ती भीड़ के बीच कुप्रबंधन की शिकायतें लगातार सामने आ रही हैं। श्रद्धालुओं का आरोप है कि विक्रेता, होटल मालिक और नाव संचालक उन्हें लूट रहे हैं, जबकि मंदिर प्रशासन और जिला प्रशासन इस पर चुप्पी साधे हुए हैं। मामलेश्वर मंदिर के संकरे प्रवेश द्वार के कारण हजारों तीर्थयात्रियों को 3-4 घंटे तक दर्शन के लिए इंतजार करना पड़ता है, और पंडों तथा मंदिर गार्डों को रिश्वत देकर ही शॉर्टकट दर्शन की व्यवस्था हो पाती है। उज्जैन के महाकालेश्वर मंदिर में भी भीड़ प्रबंधन की समस्या गंभीर हो गई है, जहां दर्शन में 45 मिनट से अधिक समय लग रहा है।

ओमकारेश्वर ज्योतिर्लिंग, जो नर्मदा नदी के किनारे स्थित है, में हाल के महीनों में वीआईपी दर्शन को लेकर विवाद बढ़ा है। ट्रस्ट के एक सदस्य ने आरोप लगाया कि डिप्टी कलेक्टर होटल मालिकों के साथ मिलीभगत कर वीआईपी एक्सेस दे रहे हैं, जबकि सामान्य श्रद्धालुओं के लिए प्रोटोकॉल दर्शन बंद कर दिया गया है। अब दर्शन के लिए 300 रुपये तक वसूले जा रहे हैं।

श्रद्धालुओं की शिकायत है कि मंदिर में कोई भीड़ नियंत्रण नहीं है, कोई उचित मार्गदर्शन नहीं, और स्थानीय लोग असहयोगी हैं। एक यात्री ने बताया कि ट्रस्ट केवल पैसे पर ध्यान दे रहा है, भक्ति या मानवता पर नहीं।सप्ताहांत पर यहां 4 घंटे तक जाम वाली कतारें लग जाती हैं, जो बच्चों और बुजुर्गों के लिए असुरक्षित हैं। सुरक्षा, पानी या भोजन की कोई व्यवस्था नहीं, और संकरी गलियां स्टांपेड की आशंका बढ़ा रही हैं।

मामलेश्वर मंदिर में स्थिति और भी खराब है। संकरे प्रवेश द्वार के कारण हजारों श्रद्धालु घंटों इंतजार करते हैं, और कोई सुरक्षा गार्ड या पुलिस नहीं है जो भीड़ को नियंत्रित करे। पंडों और गार्डों को रिश्वत देकर ही जल्दी दर्शन मिल पाता है। एक रिपोर्ट में कहा गया है कि मंदिर में अराजकता है, और वीवीआईपी दर्शन को लेकर गुस्सा बढ़ रहा है।

नाव संचालकों पर भी लूट का आरोप है, जहां कलेक्टरों ने नौकायन रोक दिया है, लेकिन होटल और विक्रेता भोजन व आवास के लिए मनमाने दाम वसूल रहे हैं। जिला प्रशासन इस पर कोई कार्रवाई नहीं कर रहा

उज्जैन के महाकालेश्वर मंदिर में 2025 में रिकॉर्ड 5.5 करोड़ श्रद्धालु पहुंचे, जिससे भीड़ प्रबंधन चुनौतीपूर्ण हो गया है। नए साल के पहले सप्ताह में वीआईपी आवागमन की उम्मीद है, लेकिन दर्शन प्रणाली में बदलाव के बावजूद भीड़ बढ़ रही है। ऑनलाइन भस्म आरती बुकिंग 25 दिसंबर 2025 से 5 जनवरी 2026 तक बंद कर दी गई। स्थानीय प्रशासन का दावा है कि रोजाना 1.5 से 2 लाख श्रद्धालु आ रहे हैं, लेकिन पार्किंग और आवास की समस्या बड़ी है।आईआईएम इंदौर 2028 के सिंहस्थ के लिए 20 साल की योजना बना रहा है, लेकिन वर्तमान स्थिति में स्टांपेड जैसी घटनाओं की आशंका बनी हुई है।

कांग्रेस ने राज्य सरकार को जिम्मेदार ठहराया है।श्रद्धालुओं का कहना है कि ये मंदिर अब पूजा स्थल कम, व्यापार ज्यादा बन गए हैं। गंदगी, गुटखा और भ्रष्टाचार की शिकायतें आम हैं। मध्य प्रदेश पर्यटन विभाग और जिला प्रशासन से अपील की जा रही है कि बेहतर प्रबंधन सुनिश्चित करें, ताकि तीर्थयात्रा सुरक्षित और सुगम हो।

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